सोमवार, 17 अगस्त 2009
आनन्द राय के बारे में
आनन्द राय गोरखपुर के अग्रणी पत्रकारोन मे एक है। वे वर्ष २००० मे गोरखपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष बने। मऊ जिले के दोहरीघाट इलाके के कोरौली गान्व के मूल निवासी आनन्द राय का जीवन उतार चढाव से भरा है। गोरखपुर मे दैनिक जागरण अखबार मे १९९५ मे वे आये। तब गोरखपुर मे आपराधिक वारदाते चरम पर थी। आनन्द राय ने पुलिस की फर्जी सूचना को किनारे करते हुए नये ढन्ग की पत्रकारिता शुरू की। उन्होने अपराधियो से सम्पर्क किया और सच्ची सूचना हासिल की। तब गोरखपुर मे ब्लाक प्रमुख सुरेन्द्र सिन्ह, विधायक ओम प्रकाश पासवान और पूर्व विधायक वीरेन्द्र प्रताप शाही जैसे लोगो की हत्याए हुई। रेलवे के ठेके को लेकर खूनी खेल शुरू हो गया था। बिहार के सूरजभान्, ब्रजबिहारी प्रसाद और भुट्कुन शुकला जैसे नामचीन अपराधियोन ने अपना वर्चस्व कायम किया था। गोरखपुर मे नेशनल फेम डान श्रीप्रकाश शुक्ला, आनन्द पान्डे, श्रीपत्, ब्र्ह्मा, प्रदीप सिन्ह जैसे अपराधियो की तूती बोलती थी। पुलिस किसी घट्ना के तह तक नही पहुन्च रही थी। आनन्द राय ने उसका खुलासा किया। बतौर उदाहरण यही कि- २५ मार्च १९९५ को बान्सगान्व मे चुनाव प्रचार के दौरान बम मारकर विधायक पासवान समेत १० लोग की हत्या कर दी गयी। हत्यारे श्रीपत्, राकेश और ब्रह्मा ने देशी बम से वारदात की और बिहार चले गये। पुलिस कह्ती थी कि हत्यारे नेपाल मे हैन और उन्हे पकड्ने की रणनीति बन रही है। तब एक दिन अचानक दैनिक जागरण मे खबर छपी पासवान के हत्यारे नकली नाम से बिहार मे गिरफ्तार। इस खबर के बाद पुलिस जागी और अपराधियोन को यहा लाया गया। आनन्द राय ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के चेहरे से नकाब उतार दिया। प्रोफेसर ने अपनी पत्नी की ह्त्या की थी और उसकी लाश लावारिस फेक दी थी। फिर कुछ बाद तलाशी का नाटक कर रहा था। आनन्द राय ने लगातार दस किश्तो मे खबर छापी और प्रोफेसर से मोटी रकम ले चुकी पुलिस को मजबूर होकर काररवाई करनी पडी। प्रोफेसर को जेल जाना पडा। लगभग १८ साल की पत्रकारिता मे आनन्द राय ने मानवीय सेवा के कार्य किये और इस नाते उन्हे कई प्रमुख सन्गठनो ने सम्मानित किया। इधर कुछ समय से आनन्द राय ने औद्योगिक इकाइयो के अपजल से प्रदूषित हो गयी आमी नदी के सफाई के लिये अभियान शुरू किया है। इससे पूर्वान्चल मे एक बडा आन्दोलन शुरू हो गया है। आमी नदी के तट पर ही राजकुमार सिध्दार्थ ने राजसी वस्त्रो का त्याग किया और गौतम बुध्द बनने की राह पर चल पडे थे। आमी नदी के तट पर ही अपने जीवन के आखिरी दिनो मे कबीर आये और मगहर तट पर एक नया इतिहास बनाया। आनन्द राय ने गोरखपुर प्रेस क्लब का प्रेसीडेन्ट रहते हुए मशहूर पत्रकार सदाशिव द्विवेदी की याद मे एक पुस्तकालय और जय प्रकाश शाही की याद मे एक सूचना क्क्ष् स्थापित कराया। उन्होने वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिन्ह बशर के गजल सन्ग्रह एक ही चेहरा का सम्पादन और प्रकाशन भी किया। पूर्व प्रधान मन्त्री वी पी सिन्ह, साहित्यकार अब्दुल विस्मिल्लाह, जाने माने पत्रकार प्रभाष जोशी, राहुल देव, अजय उपाध्याय, प्रोफेसर कमल, समेत कई नामचीन लोगो को गोरखपुर मे बुलाकर सम्वाद की एक नयी पहल की। आनन्द राय ने मूल्यनिष्ट मीडिया के लिये अभियान जारी रखा है और अब तक विभिन्न सन्गठ्नो के मन्च से दो सौ से अधिक उनका व्याख्यान भी हो चुका है। उनसे सम्पर्क के लिये ०९४१५२१०४५७ या ०५५१-२२००९०७ पर बातचीत की जा सकती है।
सोमवार, 1 जून 2009
mera man: NATIONAL ANTHEM OF INDIA
utho utho jawano kuchh to karo
kuchh suno, kuchh guno, tab dhuno
par apne liye ek maksad chuno
manjile choom legi kadam
tum utho to utho,tum chalo to chalo
kuchh suno, kuchh guno, tab dhuno
par apne liye ek maksad chuno
manjile choom legi kadam
tum utho to utho,tum chalo to chalo
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