सोमवार, 28 जुलाई 2008

ठाकुर जी

मेरे गाँव से थोडी दूर एक जगह है ठाकुरद्वारा। बहुत पहले हल चलाते समय एक मूर्ति मिली। यह मूर्ति ठाकुर जी की थी। स्थापना हुई तो फ़िर यहाँ श्रद्धा उमड़ने लगी। बाद में लोग ठाकुर जी की कस्मे खाने लगे। अब भी ठाकुर jee वहां बने हैं।